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आ गया है जीना अब तो तुमसे से मिलके।
भूल गया हूँ मैं खुद को यूं तुम से मिलके।
हंसता है जमाना मुझ पर मेरी ये हालत देखकर,
हो गया हूँ पागल जब लौटा तुमसे मिलके।
छोड़ दिया है सताना अब तो अंधेरो ने भी,
जब से सीखा जीना तुमसे मिल के।
उम्र भर न सताएंगी तेरी यादें मुझको,
हो गया हूँ बदनाम तेरे नाम से तुमसे मिलके।
भूल गए मुस्कुराना "खामोश" तेरी मुस्कान देखकर,
बिना साहिल भटक रहा समुन्दर में तुमसे मिलके।
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अमित कुमार खामोश
आ गया है जीना अब तो तुमसे से मिलके।
भूल गया हूँ मैं खुद को यूं तुम से मिलके।
हंसता है जमाना मुझ पर मेरी ये हालत देखकर,
हो गया हूँ पागल जब लौटा तुमसे मिलके।
छोड़ दिया है सताना अब तो अंधेरो ने भी,
जब से सीखा जीना तुमसे मिल के।
उम्र भर न सताएंगी तेरी यादें मुझको,
हो गया हूँ बदनाम तेरे नाम से तुमसे मिलके।
भूल गए मुस्कुराना "खामोश" तेरी मुस्कान देखकर,
बिना साहिल भटक रहा समुन्दर में तुमसे मिलके।
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अमित कुमार खामोश
गज़ल/नज्म
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