होश खो बैठे तुम्हे देखने वाले।
मशहूर हो गए तुम्हे चाहने वाले।
न बच सके तुम्हारी तिरछी नज़रों से,
जो बदनाम थे कभी कत्ल करने वाले।
पीते गए हम जाम पे जाम नशा न हुआ,
हुए मदहोश तुम्हारे पास से गुजरने वाले।
सबकी ख्वाहिश-ए-हासिल तुम क्यों न हो,
मांगते सांसे तेरे दीदार को कब्र में रहने वाले।
खता हो गई "खामोश" चिराग़ों से दोस्ती करके,
मिल गई रोशनी सबको तुम्हारे साथ चलने वाले।
..........................................................................
अमित कुमार"खामोश"
मशहूर हो गए तुम्हे चाहने वाले।
न बच सके तुम्हारी तिरछी नज़रों से,
जो बदनाम थे कभी कत्ल करने वाले।
पीते गए हम जाम पे जाम नशा न हुआ,
हुए मदहोश तुम्हारे पास से गुजरने वाले।
सबकी ख्वाहिश-ए-हासिल तुम क्यों न हो,
मांगते सांसे तेरे दीदार को कब्र में रहने वाले।
खता हो गई "खामोश" चिराग़ों से दोस्ती करके,
मिल गई रोशनी सबको तुम्हारे साथ चलने वाले।
..........................................................................
अमित कुमार"खामोश"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
http://www.nilkhamos.blogspot.com