बुधवार, 15 अगस्त 2018

कुछ दर्द है सीने में..........

कुछ दर्द है सीने में कुछ तमन्नाएं हैं अधूरी।
जिंदगी कुछ कम है और दिल की है बेक़सूरी।

शिकवा है खुद से, गिला नहीं कोई ज़माने से,
ज़िंदा किसी की मेहरबानी से, नहीं है मजबूरी।

सीखा दिल से जीना जिंदगी की सुबह शाम को,
फिर भी दिन कटता नहीं, कहीं तो है दुश्वारी।

चलना सीख गए अंधेरो में  तुम्हे इस तरह पाकर,
कदम बहक जाते होश में तुम याद न करो जब हमारी।

तो क्या हुआ "खामोश" जो मंजिल गुमराह कर गई,
शहंसाओ की ज़िंदगी में भी अब जरूरी है फकीरी।
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                  अमित कुमार "खामोश"

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