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लगी है भूख आदमी को दौलत की।
बुझती नहीं प्यास कभी शोहरत की।
तुम जो कर दो अपने इश्क में फ़ना मुझको,
पूरी हो जायेगी मेरी ख्वाहिश जन्नत की।
कर न पाये हक़ीम दवा मरीज ए इश्क की,
जरूरत है तुम्हे अब ख़ुदा ए रहमत की।
पाने तुम्हारी चाहत निकल आएंगे कब्र से,
इंतजार है तो सिर्फ तुम्हारी इजाजत की।
हम जा रहे हमें मुस्कुरा के विदा करो "खामोश"
ठहर गये आँसू जो तुमने ऐसी अदावत की।
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अमित कुमार ख़ामोश
लगी है भूख आदमी को दौलत की।
बुझती नहीं प्यास कभी शोहरत की।
तुम जो कर दो अपने इश्क में फ़ना मुझको,
पूरी हो जायेगी मेरी ख्वाहिश जन्नत की।
कर न पाये हक़ीम दवा मरीज ए इश्क की,
जरूरत है तुम्हे अब ख़ुदा ए रहमत की।
पाने तुम्हारी चाहत निकल आएंगे कब्र से,
इंतजार है तो सिर्फ तुम्हारी इजाजत की।
हम जा रहे हमें मुस्कुरा के विदा करो "खामोश"
ठहर गये आँसू जो तुमने ऐसी अदावत की।
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अमित कुमार ख़ामोश
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