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नहीं जाती दुआ खाली किसी गरीब की।
बदल जाती है जिंदगी बिगड़े नसीब की।
आंको न चेहरे को सबके दिल में रब है,
हो जायेगी बदनामी इंसा शरीफ की।
सब खफ़ा तुम्हारे अंदाज ए दिल्लगी से,
जरूरत तुम्हे तो दवा ए तहजीब की।
बीमार कर गये तुम यूँ सामने आकर,
छूकर न देखी तबियत भी तुमने मरीज की।
बहुत मिलता है "ख़ामोश" इश्क बांटने वालों को,
सिर्फ बददुआ न लेना कभी किसी फ़क़ीर की।
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अमित कुमार "ख़ामोश"
नहीं जाती दुआ खाली किसी गरीब की।
बदल जाती है जिंदगी बिगड़े नसीब की।
आंको न चेहरे को सबके दिल में रब है,
हो जायेगी बदनामी इंसा शरीफ की।
सब खफ़ा तुम्हारे अंदाज ए दिल्लगी से,
जरूरत तुम्हे तो दवा ए तहजीब की।
बीमार कर गये तुम यूँ सामने आकर,
छूकर न देखी तबियत भी तुमने मरीज की।
बहुत मिलता है "ख़ामोश" इश्क बांटने वालों को,
सिर्फ बददुआ न लेना कभी किसी फ़क़ीर की।
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अमित कुमार "ख़ामोश"
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