ठहर गए हम मौत के पास तुमसे दूर रह कर।
गम देते आगे कहानी में तुम इन्तजार कह कर।
मिल के बिछड़ना, बिछड़ के मिलना कब तक,
कर दो खत्म दर्द-ए-दिल तुम मेरे पास आ कर।
बन न जाये ये शहर की दूरी कहीं दिल की दूरी,
पा लूंगा तुम्हे अगली बार इस ज़िन्दगी में मर कर।
बंदिशें कर रहीं कैद हम दोनों को धीरे धीरे से,
इन्तजार जब तक जिस्म हो न जाये खाक जल कर।
सुनाते रहेंगे "खामोश" मजबूरी अपने हालात की,
बिखर जाएगा जो देखा था ख्वाब तुमसे जुदा हो कर।
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अमित कुमार " ख़ामोश"
गम देते आगे कहानी में तुम इन्तजार कह कर।
मिल के बिछड़ना, बिछड़ के मिलना कब तक,
कर दो खत्म दर्द-ए-दिल तुम मेरे पास आ कर।
बन न जाये ये शहर की दूरी कहीं दिल की दूरी,
पा लूंगा तुम्हे अगली बार इस ज़िन्दगी में मर कर।
बंदिशें कर रहीं कैद हम दोनों को धीरे धीरे से,
इन्तजार जब तक जिस्म हो न जाये खाक जल कर।
सुनाते रहेंगे "खामोश" मजबूरी अपने हालात की,
बिखर जाएगा जो देखा था ख्वाब तुमसे जुदा हो कर।
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अमित कुमार " ख़ामोश"
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