http://www.nilkhamos.blogspot.com
करके हासिल मंजिल दुनिया को दिखाना है।
कहे जब जमाना ये तो बड़ा अजीब दीवाना है।
डूब जाते हैं कुछ लोग समुन्दर की लहरों से,
निकालना कश्ती तूफ़ान से सबको सिखाना है।
गुजार देते हैं ताउम्र एक ख्वाहिश पूरी करने में,
तुमको तो हजारों कामयाबियों से मिलाना है।
जो बात है तुम में वो किसी में हो नही सकती,
फिर तुम्हेअपनी शोहरत को याद दिलाना है।
ग़मज़दा हो भी गए तो परवाह न की "खामोश",
हरा के खुद को किसी चेहरे को जिताना है।
..........................................................................
अमित कुमार " खामोश"
करके हासिल मंजिल दुनिया को दिखाना है।
कहे जब जमाना ये तो बड़ा अजीब दीवाना है।
डूब जाते हैं कुछ लोग समुन्दर की लहरों से,
निकालना कश्ती तूफ़ान से सबको सिखाना है।
गुजार देते हैं ताउम्र एक ख्वाहिश पूरी करने में,
तुमको तो हजारों कामयाबियों से मिलाना है।
जो बात है तुम में वो किसी में हो नही सकती,
फिर तुम्हेअपनी शोहरत को याद दिलाना है।
ग़मज़दा हो भी गए तो परवाह न की "खामोश",
हरा के खुद को किसी चेहरे को जिताना है।
..........................................................................
अमित कुमार " खामोश"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
http://www.nilkhamos.blogspot.com