http://www.nilkhamos.blogspot.com
जब बदल नहीं सकती फ़ितरत।
उनसे हो ही नहीं सकती इबादत।
अमल न बातों का जिंदगी में किया,
कभी कबूल हो नहीं सकती जियारत।
इश्क है सच्चा जिनको ख़ुदा से ही,
उनसे हो ही नहीं सकती हिमाकत।
दिल में कुछ और होंठों पे कुछ और,
वो दुआ कर नहीं सकती हिफ़ाजत।
लेकर वफ़ा "खामोश" देते हैं बेवफ़ाई,
मुहब्बत ए खुदा कर नहीं सकती तिजारत।
..................................................................
*फ़ितरत- चालबाजी
*जियारत- तीर्थयात्रा
*हिमाकत- मूर्खता
*तिजारत-वयापार। अमित कुमार " खामोश"
जब बदल नहीं सकती फ़ितरत।
उनसे हो ही नहीं सकती इबादत।
अमल न बातों का जिंदगी में किया,
कभी कबूल हो नहीं सकती जियारत।
इश्क है सच्चा जिनको ख़ुदा से ही,
उनसे हो ही नहीं सकती हिमाकत।
दिल में कुछ और होंठों पे कुछ और,
वो दुआ कर नहीं सकती हिफ़ाजत।
लेकर वफ़ा "खामोश" देते हैं बेवफ़ाई,
मुहब्बत ए खुदा कर नहीं सकती तिजारत।
..................................................................
*फ़ितरत- चालबाजी
*जियारत- तीर्थयात्रा
*हिमाकत- मूर्खता
*तिजारत-वयापार। अमित कुमार " खामोश"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
http://www.nilkhamos.blogspot.com