सोमवार, 27 अगस्त 2018

कुछ बीमार.......

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कुछ बीमार से लगते हो।
जब सामने मेरे आते हो।

मुरझाये फूल से तुम हो,
जब पलकें झपकते हो।

नशे में हो तुम शायद ,
जो कदम डगमगाते हो।

कर ली है दोस्ती आग से,
तुम सबके दिल जलाते हो।

गुजरते हो "ख़ामोश" तुम चमन से,
तब फूल तुम खिलाते हो।
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               अमित कुमार ख़ामोश

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