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कुछ बीमार से लगते हो।
जब सामने मेरे आते हो।
मुरझाये फूल से तुम हो,
जब पलकें झपकते हो।
नशे में हो तुम शायद ,
जो कदम डगमगाते हो।
कर ली है दोस्ती आग से,
तुम सबके दिल जलाते हो।
गुजरते हो "ख़ामोश" तुम चमन से,
तब फूल तुम खिलाते हो।
..............................................................
अमित कुमार ख़ामोश
कुछ बीमार से लगते हो।
जब सामने मेरे आते हो।
मुरझाये फूल से तुम हो,
जब पलकें झपकते हो।
नशे में हो तुम शायद ,
जो कदम डगमगाते हो।
कर ली है दोस्ती आग से,
तुम सबके दिल जलाते हो।
गुजरते हो "ख़ामोश" तुम चमन से,
तब फूल तुम खिलाते हो।
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अमित कुमार ख़ामोश
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