कर गई तबाह तेरी मुहब्बत मुझको।
दिखी थी तुम में कभी ज़न्नत मुझको।
कहाँ जाए टूटे दिल,पस्त हौसलों को लेकर,
सम्हल जाते थे कभी हम देखकर तुमको।
रह न पाओगे एक पल मेरे बिना तुम अकेले,
हो न हिफाजत तो सौंप देना मेरा दिल मुझको।
पाल रखे हैं बड़े बड़े शौक अजीब से तुमने,
समझदारी नादानी में भी हो मुबारक तुमको।
कर दिया मशहूर बेवफाई को वफ़ा के नाम पर,
किया था इश्क दोनो ने बदनाम कर दिया मुझको।
...................................................................................
अमित कुमार "खामोश"
दिखी थी तुम में कभी ज़न्नत मुझको।
कहाँ जाए टूटे दिल,पस्त हौसलों को लेकर,
सम्हल जाते थे कभी हम देखकर तुमको।
रह न पाओगे एक पल मेरे बिना तुम अकेले,
हो न हिफाजत तो सौंप देना मेरा दिल मुझको।
पाल रखे हैं बड़े बड़े शौक अजीब से तुमने,
समझदारी नादानी में भी हो मुबारक तुमको।
कर दिया मशहूर बेवफाई को वफ़ा के नाम पर,
किया था इश्क दोनो ने बदनाम कर दिया मुझको।
...................................................................................
अमित कुमार "खामोश"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
http://www.nilkhamos.blogspot.com