मंगलवार, 21 अगस्त 2018

हमें आ गया मजा तुम्हारे.......

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हमें आ गया  मजा तुम्हारे  साथ बहकने  में।
शोलों की आग क्या जो मजा दिल दहकने में।

संवरने दो उनको जी भर के आईने के सामने,
अभी लग जायेगी थोड़ी देर चाँद निकलने में,

लिपटी जो है खुश्बू तुम्हारे गुलबदन हुस्न में,
कर दो जरा सी शरारत फूलों के महकने में।

शिकार हमने भी किये थे मगर हुआ न कोई,
कई कर डाले तुमने कत्ल पलक झपकने में।

आरजू-ए-मुहब्बत तुम लग जाते मेरे सीने से,
"खामोश" सांसे जो नाम न हो तेरा धड़कन में।
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            अमित कुमार "खामोश"




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