रविवार, 12 अगस्त 2018

कोई बात हो तो छिपाया न करो..


कोई बात हो तो छिपाया न करो।
कोई राज दिल में दबाया न करो।

यूँ तो हर दर्द के हकीम हैं हम साकी,
सिर्फ तुम मेरे सामने आया न करो।

तुम ही हो गुनेहगार अपनी चोट के,
अपने आईने के सामने जाया न करो।

तुम मेरे पास आओ न आओ तुम्हारी मर्ज़ी,
निकलकर गली में सबको सताया न करो।

जो कहती हैं आँखे वो जुबाँ से भी कह दो,
कहेगा ज़माना आशिक़ों को आजमाया न करो।


मैं सींचता रहा खियाबां तमाम उम्र तक,
तुम तोड़कर फूल कांटा लगाया न करो।

हो जाते हैं कत्ल मासूम लोग भी देखकर,
तुम आंखों में काजल लगाया न करो।

इस कदर रोयेंगे तुम्हें पाने को "खामोश",
कहेगा फिर समुन्दर ऐसे तुम रोया न करो।

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अमित कुमार उर्फ ख़ामोश

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