क्या लोगी तुम कीमत मुझे अपना बनाने की।
देने के अलावा सांसे हैसीयत नहीं दीवाने की।
देखता हूँ मैं खूबसूरत चेहरे यूँ तो हर रोज,
सिर्फ तुम हो मलिका-ए-हुस्न इस ज़माने की।
ये तेरा साथ साथ चलकर करना बात मुझसे,
क्या मुझे अब भी जरूरत है तुम्हें मनाने की।
सबको नसीब होती हैं मजबूरियां ज़िन्दगी में,
हमने तो पाई है सज़ा जहाँ में मुस्कुराने की।
वादा ला देंगें जन्नत "खामोश" तुम्हारे कदमो में,
रखेंगे लोग याद कहानी अपने आशियाने की।
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अमित कुमार "खामोश"
देने के अलावा सांसे हैसीयत नहीं दीवाने की।
देखता हूँ मैं खूबसूरत चेहरे यूँ तो हर रोज,
सिर्फ तुम हो मलिका-ए-हुस्न इस ज़माने की।
ये तेरा साथ साथ चलकर करना बात मुझसे,
क्या मुझे अब भी जरूरत है तुम्हें मनाने की।
सबको नसीब होती हैं मजबूरियां ज़िन्दगी में,
हमने तो पाई है सज़ा जहाँ में मुस्कुराने की।
वादा ला देंगें जन्नत "खामोश" तुम्हारे कदमो में,
रखेंगे लोग याद कहानी अपने आशियाने की।
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अमित कुमार "खामोश"
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