http://www.nilkhamos.blogspot.com
था इंतजार सदियों से तब दीदार हुए।
था सामने हकीम और हम बीमार हुए।
दिया दर्द काँटो से ज्यादा बातों ने मुझको,
जाल मेरा था फिर भी उनके शिकार हुए।
खाई थी कसमें हसीन मंजिल पाने को साथ,
वो मलिका-ए-हुस्न हुई और हम बेकार हुए।
लाश बन गया जिस्म जुदा रूह से होकर,
हम जमीन हवाले वो औरों पे निसार हुए।
सच थी "खामोश"आशिकी हाल लेने जो आये,
खोदने को कब्र मेरी उनके हाथ औजार हुए।
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अमित कुमार "खामोश"
था इंतजार सदियों से तब दीदार हुए।
था सामने हकीम और हम बीमार हुए।
दिया दर्द काँटो से ज्यादा बातों ने मुझको,
जाल मेरा था फिर भी उनके शिकार हुए।
खाई थी कसमें हसीन मंजिल पाने को साथ,
वो मलिका-ए-हुस्न हुई और हम बेकार हुए।
लाश बन गया जिस्म जुदा रूह से होकर,
हम जमीन हवाले वो औरों पे निसार हुए।
सच थी "खामोश"आशिकी हाल लेने जो आये,
खोदने को कब्र मेरी उनके हाथ औजार हुए।
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अमित कुमार "खामोश"
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