शनिवार, 18 अगस्त 2018

था इंतजार सदियों से.......

http://www.nilkhamos.blogspot.com

था इंतजार सदियों से तब दीदार हुए।
था सामने हकीम और हम बीमार हुए।

दिया दर्द काँटो से ज्यादा बातों ने मुझको,
जाल मेरा था फिर भी उनके शिकार हुए।

खाई थी कसमें हसीन मंजिल पाने को साथ,
वो मलिका-ए-हुस्न हुई और हम बेकार हुए।

लाश बन गया जिस्म जुदा रूह से होकर,
हम जमीन हवाले वो औरों पे निसार हुए।

सच थी "खामोश"आशिकी हाल लेने जो आये,
खोदने को कब्र मेरी उनके हाथ औजार हुए।
...................................................................
                    अमित कुमार "खामोश"




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

http://www.nilkhamos.blogspot.com

हम थोड़े से हैं...........

www.nilkhamos.blogspot.com हम थोड़े से तो जरूर हैं तुम्हारी जिन्दगी में शामिल। वो अलग बात कि नहीं हूं बिल्कुल मैं तुम्हारे काबिल। हम ...