http://www.nilkhamos.blogspot.com
छुपकर देखते थे सरे आम हुऐ।
गली से गुजरे तो बद नाम हुए।
मिला दर्द जब गम से रूबरू हुए,
खुशी के लिए जाम पे जाम हुए।
हर अंग कयामत है ये सुना है,
निग़ाहों से सब कत्ले आम हुए।
अलग अंदाज चाहे आजमा लेना,
जो तुम्हे चाहने वाले तमाम हुए।
बहाना ढूढ़ते तेेरे दीदार के लिए,
तेरे घर के सामने मेरे काम हुए।
"खामोश' मुहब्ब्त सही इजहार से,
हम आबाद और कुछ गुम नाम हुए।
...........................................................................
अमित कुमार "खामोश"
छुपकर देखते थे सरे आम हुऐ।
गली से गुजरे तो बद नाम हुए।
मिला दर्द जब गम से रूबरू हुए,
खुशी के लिए जाम पे जाम हुए।
हर अंग कयामत है ये सुना है,
निग़ाहों से सब कत्ले आम हुए।
अलग अंदाज चाहे आजमा लेना,
जो तुम्हे चाहने वाले तमाम हुए।
बहाना ढूढ़ते तेेरे दीदार के लिए,
तेरे घर के सामने मेरे काम हुए।
"खामोश' मुहब्ब्त सही इजहार से,
हम आबाद और कुछ गुम नाम हुए।
...........................................................................
अमित कुमार "खामोश"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
http://www.nilkhamos.blogspot.com