शनिवार, 1 सितंबर 2018

तेरी नजरों का तीर............

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तेरी नजरों का तीर जो मेरी ओर चला था।
मैं लेने मरहम ए जख्म तेरी ओर चला था।

मैंने खाई चोट खुद ही दीवार बनकर,
जिस कदर होकर मैं नशे में चूर चला था।

कर ली दुनिया हासिल जिसने अपने दम पर,
हकीकत में वो जमीं से बहुत दूर चला था।

उतारी जब तुमने अपनी कश्ती दरिया में तो,
किनारा तब समुन्दर का मैं छोड़ चला था।

कमजोर मकां में रहने वाले मजबूत दिल होते थे,
इस जहाँ में भी "ख़ामोश" ऐसा दौर चला था।
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                 अमित कुमार ख़ामोश

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