शनिवार, 1 सितंबर 2018

लौट आना मेरे पास जब शाम हो..........

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लौट आना मेरे पास जब शाम हो जाये।
अधूरा जो रह गया वो मेरा काम हो जाये।

हर कोई चाहता है तुमसे दिल्लगी करना,
करेंगे हम ऐसी दोस्ती कि नाम हो जाये।

सब आते हैं पूछने मेरे दर्द ए दिल की वजह,
डरता हूँ बताने से कहीं वो न बदनाम हो जाये।

तुम्हारे साथ रहकर हमें होता था जो नशा,
मिलता नहीं कोई अब जिसके साथ इक जाम हो जाये।

ढूंढ़ते फिरते हैं "ख़ामोश" मेरे जैसा कोई आशिक,
देखें कहीं कोई आज फिर सरेआम हो जाये।
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           अमित कुमार ख़ामोश




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