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तुम ही से तो मेरा वजूद है।
धड़कना दिल इसका सबूत है।
ढूँढते तुमको फ़िरते सब इबादत खाने में,
खुद को ढूँढते हम बस इतना जरूर है।
लगया न गले हमने किसी को मुहब्बत से,
बनाकर आदमी मुझको तुमने की करतूत है।
बसा लेंगें तुमको अपने मकान ए इश्क में,
माना जिस्म कमजोर मगर दिल मजबूत है।
रूठ गए तुम तो "ख़ामोश" किधर जाएंगे,
कैसे उतरेगा चढ़ा मुझपे तुम्हरा जो सरूर है।
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अमित कुमार ख़ामोश
तुम ही से तो मेरा वजूद है।
धड़कना दिल इसका सबूत है।
ढूँढते तुमको फ़िरते सब इबादत खाने में,
खुद को ढूँढते हम बस इतना जरूर है।
लगया न गले हमने किसी को मुहब्बत से,
बनाकर आदमी मुझको तुमने की करतूत है।
बसा लेंगें तुमको अपने मकान ए इश्क में,
माना जिस्म कमजोर मगर दिल मजबूत है।
रूठ गए तुम तो "ख़ामोश" किधर जाएंगे,
कैसे उतरेगा चढ़ा मुझपे तुम्हरा जो सरूर है।
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अमित कुमार ख़ामोश
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