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वो कहते हैं कि उनके बिना हम नहीं जी पाएंगे।
हम वो हैं कि जहर शराब में मिलाकर पी जाएंगे।
हम हुए सबके सामने साबित गुनेहगार तो,
बनकर गवाह अदालत वो भी जाएंगे।
थका सा चाँद बुझी रोशनी बोझिल सी ये रात,
कह दो आ जाएं वो तो चिराग़ फिर जी जाएंगे।
मंजूर नहीं हमको जो सज़ा ज़माने ने मुझे दे दी,
कराने कत्ल हम उनकी नज़रों के सामने ही जायेंगे।
छोड़ दो साथ गम न होगा "ख़ामोश" दिल को मगर,
दोस्त समुन्दर को अपनी आंखों का दे पानी जाएंगे।
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अमित कुमार ख़ामोश
वो कहते हैं कि उनके बिना हम नहीं जी पाएंगे।
हम वो हैं कि जहर शराब में मिलाकर पी जाएंगे।
हम हुए सबके सामने साबित गुनेहगार तो,
बनकर गवाह अदालत वो भी जाएंगे।
थका सा चाँद बुझी रोशनी बोझिल सी ये रात,
कह दो आ जाएं वो तो चिराग़ फिर जी जाएंगे।
मंजूर नहीं हमको जो सज़ा ज़माने ने मुझे दे दी,
कराने कत्ल हम उनकी नज़रों के सामने ही जायेंगे।
छोड़ दो साथ गम न होगा "ख़ामोश" दिल को मगर,
दोस्त समुन्दर को अपनी आंखों का दे पानी जाएंगे।
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अमित कुमार ख़ामोश
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