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वो मेरे दर्द की इंतिन्हां देखेंगे।
वो मेरी सब मजबूरियां देखेंगे।
जलाकर सबके दिल ओ जिस्म,
वो कई रोशनियां देखेंगे।
रहकर जश्न ए महफ़िल में,
वो मेरी तन्हाइयां देखेंगे।
होकर आबाद इस जहां में,
वो मेरी बरबादियां देखेंगे।
तुम निकले सैलाब लेकर जो " ख़ामोश",
वो राह में तबाहियां देखेंगे।
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अमित कुमार ख़ामोश
वो मेरे दर्द की इंतिन्हां देखेंगे।
वो मेरी सब मजबूरियां देखेंगे।
जलाकर सबके दिल ओ जिस्म,
वो कई रोशनियां देखेंगे।
रहकर जश्न ए महफ़िल में,
वो मेरी तन्हाइयां देखेंगे।
होकर आबाद इस जहां में,
वो मेरी बरबादियां देखेंगे।
तुम निकले सैलाब लेकर जो " ख़ामोश",
वो राह में तबाहियां देखेंगे।
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अमित कुमार ख़ामोश
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