मंगलवार, 4 सितंबर 2018

वो मेरे दर्द की इंतिन्हा..................

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वो मेरे दर्द की इंतिन्हां देखेंगे।
वो मेरी सब मजबूरियां देखेंगे।

जलाकर सबके दिल ओ जिस्म,
वो कई रोशनियां देखेंगे।

रहकर जश्न ए महफ़िल में,
वो मेरी तन्हाइयां देखेंगे।

होकर आबाद इस जहां में,
वो मेरी बरबादियां देखेंगे।

तुम निकले सैलाब लेकर जो " ख़ामोश",
वो राह में तबाहियां देखेंगे।
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                   अमित कुमार ख़ामोश

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