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मेरे मिट जाएं गम तुम ऐसा कर दो।
कुछ न सही तो अपने जैसा कर दो।
तुम्हारे पहलू में सम्हल जाए मेरा दिल,
इतना सा फायदा तुम मेरा कर दो।
देकर पनाह सबको अपनी महफ़िल में,
जो बेघर हैं उन्हें तुम सहारा कर दो।
छिपाते फ़िरते हैं वो जमाने से इश्क तो,
बयाँ न लफ्जों में तो आंख से इशारा कर दो।
क्या है "ख़ामोश" जो तुम न कर सको,
नजरों से तुम दुश्मन को भी अपना कर दो।
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अमित कुमार ख़ामोश
मेरे मिट जाएं गम तुम ऐसा कर दो।
कुछ न सही तो अपने जैसा कर दो।
तुम्हारे पहलू में सम्हल जाए मेरा दिल,
इतना सा फायदा तुम मेरा कर दो।
देकर पनाह सबको अपनी महफ़िल में,
जो बेघर हैं उन्हें तुम सहारा कर दो।
छिपाते फ़िरते हैं वो जमाने से इश्क तो,
बयाँ न लफ्जों में तो आंख से इशारा कर दो।
क्या है "ख़ामोश" जो तुम न कर सको,
नजरों से तुम दुश्मन को भी अपना कर दो।
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अमित कुमार ख़ामोश
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